फरेब मेरी फ़ितरत है ।।

फरेब मेरी फितरत है,मोहब्बत का ख्वाब क्या देखूं। सवाल मेरे सब साकित हैंअब इनके जवाब क्या देखूं।। अद्ल-ए-वफ़ा की उम्मीद थी,बेवफ़ाई का हिसाब क्या देखूं। मैं रु-ए-आशिक़ पे चढ़ा रश्क…